राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 में ओबीसी आरक्षण लागू। सरपंच की 2900 और पंच की 24,000 सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित होंगी। पूरी जानकारी पढ़ें।
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: ओबीसी आरक्षण पर बड़ा अपडेट
राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनाव 2026 को लेकर ओबीसी आरक्षण पर अहम जानकारी सामने आई है। ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
प्रस्तावित आंकड़ों के अनुसार, पंचायत चुनाव में सरपंच पद की लगभग 2900 सीटें और पंच पद की करीब 24 हजार सीटें ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी।
12–15 दिन में सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग अपनी रिपोर्ट 12 से 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को सौंपेगा। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान द्वारा पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी और सीटों का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।
राज्य में वर्तमान में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें हैं। आयोग ने पहली बार लगभग 1.9 लाख वार्डों का डाटा विश्लेषण किया है, जिसमें करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग का कार्यकाल बढ़ा
ओबीसी आरक्षण निर्धारण के लिए गठित आयोग का कार्यकाल अब तक दो बार बढ़ाया जा चुका है। पहले आयोग का कार्यकाल 31 मार्च तक बढ़ाया गया था।
आयोग का गठन 9 मई 2025 को किया गया था और शुरू में रिपोर्ट के लिए तीन महीने का समय तय था। बाद में इसे बढ़ाकर अब मार्च 2026 तक कर दिया गया है। यानी आयोग को कुल 10 महीने का समय इस कार्य के लिए मिला है।
राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर ओबीसी आरक्षण से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है। ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव में सरपंच और पंच पदों पर बड़ी संख्या में सीटें ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित की जाएंगी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पंचायत चुनाव में सरपंच पद की लगभग 2900 सीटें और पंच पद की करीब 24 हजार सीटें ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि, इन आंकड़ों की अंतिम पुष्टि आयोग की रिपोर्ट जारी होने के बाद ही होगी।
12 से 15 दिन में सौंपेगा आयोग रिपोर्ट
ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग अपनी रिपोर्ट 12 से 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को सौंपेगा। इसके बाद पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया और लॉटरी सिस्टम के जरिए सीटों का निर्धारण किया जाएगा।
राज्य में वर्तमान में करीब 14,403 ग्राम पंचायतें हैं। आयोग के अनुसार, यह पहली बार है जब लगभग 1.9 लाख वार्डों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, जिनकी संख्या में करीब 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।










